रायपुर: हमारे देश के गरीब और बेसहारा विधायकों को रहने के लिए एक अदद ‘VIP कॉलोनी’ की सख्त जरूरत थी। आखिर, दिन-रात जनता की सेवा में पसीना बहाने वाले माननीय अगर एक शानदार और शांत जगह पर नहीं रहेंगे, तो राज्य का विकास कैसे होगा? इसी महान उद्देश्य की पूर्ति के लिए सोमवार को नवा रायपुर के नकटी गांव में ‘विकास का बुलडोजर’ गरजता हुआ पहुंचा और 80 से ज्यादा गरीब परिवारों के घरों को पलक झपकते ही मलबे में तब्दील कर दिया। इसे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कहना गलत होगा, यह तो माननीयों के लिए किया गया गरीबों का ‘महान त्याग’ है!

मलबे में दबाई गई ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ की सफलता अलसुबह जब प्रशासन का भारी-भरकम लश्कर बुलडोजरों के साथ पहुंचा, तो ग्रामीणों को लगा कोई आपदा आ गई है। लेकिन उन्हें जल्द ही समझा दिया गया कि उनके कच्चे-पक्के मकान, जिन्हें उन्होंने पाई-पाई जोड़कर और ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ का कर्ज लेकर बनाया था, दरअसल ‘विकास’ के रास्ते में रोड़ा हैं। आंखों के सामने अपने घरों को टूटता देख, महिलाओं और बुजुर्गों के आंसू छलक पड़े—शायद वे अपने नेताओं को नई कॉलोनी मिलने की खुशी बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे।
20 लोगों के लिए 1 कमरे का ‘राजमहल’ प्रशासन की दरियादिली देखिए! बेघर हुए इन लोगों को सड़क पर नहीं छोड़ा गया है, बल्कि उन्हें नवा रायपुर के सेक्टर 30 में ईडब्ल्यूएस (EWS) के ‘आलीशान’ एक कमरे वाले फ्लैट्स दिए गए हैं।
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पारिवारिक एकता का अद्भुत मॉडल: जिन परिवारों में 15 से 20 सदस्य हैं, उन्हें एक ही कमरे में रहने का सुनहरा अवसर मिला है। प्रशासन का मानना है कि जगह कम होने से परिवार के सदस्यों में प्यार और एकजुटता बढ़ेगी।
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सुविधाओं से ‘मुक्ति’: ग्रामीणों की शिकायत है कि नए फ्लैट्स में बिजली, पानी और खिड़कियां नहीं हैं। जाहिर है, प्रशासन उन्हें प्रकृति के करीब रहने और ‘मिनिमलिज्म’ (कम में गुजारा करने) की कला सिखाना चाहता है।
सियासत: विपक्ष की अचानक जागृत हुई ‘अंतरात्मा’ जैसे ही गरीबों के घर टूटने का वीडियो वायरल हुआ, विपक्ष के नेताओं की सोई हुई अंतरात्मा ने अचानक अलार्म बजा दिया।
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कांग्रेस के कुछ विधायकों (जनक राम ध्रुव, चातुरी नंद, और कविता प्राण लहरे) ने तुरंत मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर ऐलान कर दिया कि वे गरीबों की आहों पर बनी इस ‘शापित’ कॉलोनी में नहीं रहेंगे।
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नेताओं का यह त्याग वाकई काबिले तारीफ है, हालांकि यह ज्ञान उन्हें तब आया जब 80 घरों की ईंट से ईंट बज चुकी थी। पूर्व मुख्यमंत्री भी मौके पर पहुंचे और मलबे के सामने खड़े होकर फोटो-ऑप… माफ़ कीजिएगा, ‘एकजुटता’ का शानदार प्रदर्शन किया।
फिलहाल, नकटी गांव का मलबा चीख-चीख कर गवाही दे रहा है कि राज्य में विकास कितनी तेज गति से हो रहा है। प्रशासन अपने इस ‘मास्टरस्ट्रोक’ पर गदगद है कि उसने कुछ हेक्टेयर जमीन खाली करा ली है। अब बस इंतजार इस बात का है कि इन उजड़े हुए घरों की नींव पर माननीयों के महल कितनी जल्दी खड़े होते हैं। आखिर, बेघर हुए बच्चों के आंसुओं पर बनी कॉलोनी में जो ठंडक मिलेगी, वह किसी AC में कहां!